
डॉ. बिजय महाराणा ने 100 बार रक्तदान पूरा किया रक्तदान जीवनदान के समान है। आजकल रक्त न केवल कैंसर रोगियों के लिए बल्कि ऑपरेशन के दौरान हर किसी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डॉ. बिजय महाराणा, मुंबई के गृह कल्याण केंद्र में योग प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत एक मेहनती व्यक्ति हैं। वे लोकप्रिय रूप से “डॉ. डब्बा वाला” के नाम से जाने जाते हैं। समाज और राष्ट्र के प्रति अपने परोपकारी सामाजिक कल्याण कार्यों के माध्यम से डॉ. महाराणा ने समाज में अमूल्य योगदान दिया है। हाल ही में उन्हें नई दिल्ली में प्रतिष्ठित “दिल्ली रत्न पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। वे राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता हैं और राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता संघ (NYAFI) ने उन्हें NYAFI का राष्ट्रीय महासचिव चुना है। डॉ. बिजय न केवल योग चिकित्सा सिखाते हैं, बल्कि एक महान सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। 1985 में, जब वे ओडिशा के क्योंझर जिले के आनंदपुर कॉलेज में अध्ययनरत थे, तब उन्होंने रक्तदान करना शुरू किया ।आज उन्होंने 100 बार रक्तदान पूरा कर लिया है और कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने उनकी परोपकारी सामाजिक कल्याण सेवाओं की प्रशंसा की है। NYAFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जावेद जमादार ने कहा कि सौ बार रक्तदान करना कोई छोटी बात नहीं है। डॉ. जमादार ने आगे कहा कि डॉ. बिजय युवाओं के लिए एक आदर्श हैं, हम सभी राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता और भारत सरकार उनके इस नेक कार्य पर गर्व महसूस करती है।टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुंबई में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति डी. देसाई ने डॉ. महाराणा को बधाई देते हुए कहा, “डॉ. महाराणा ने कैंसर रोगियों के लिए कई रक्तदान शिविर आयोजित किए हैं। उनके 100 बार रक्तदान करने पर मुझे बहुत गर्व हो रहा है, जो निश्चित रूप से सभी को प्रेरित करेगा।”डॉ. जे.एम. सिंह, कल्याण अधिकारी, DoPT और गृह कल्याण केंद्र प्रभारी ने कहा, “मुझे डॉ. महाराणा पर बहुत गर्व है, जो पिछले 30 वर्षों से कैंसर रोगियों के लिए समर्पित रूप से काम कर रहे हैं। आज उन्होंने 100 बार रक्तदान पूरा किया है, जो निश्चित रूप से सभी को प्रेरित करेगा।” डॉ. सिंह ने आगे कहा कि डॉ. महाराणा ने नई दिल्ली स्थित Dopt में कैंसर रोगियों के लिए कई रक्तदान शिविरों का आयोजन भी किया, जो बेहद सफल रहे। महाराणा को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।