सुन्नी इज्तेमा में अहम फैसले: इंश्योरेंस को जायज बताया,

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विरासत (संपत्ति) के नियमों पर सख्ती

मुंबई / अकबर खान

33वें सालाना सुन्नी इज्तेमा के प्रश्न-उत्तर सत्र में विद्वानों ने आधुनिक आर्थिक मुद्दों और पारिवारिक मामलों पर महत्वपूर्ण धार्मिक मार्गदर्शन जारी किया।
इंश्योरेंस पर फैसला:
विद्वानों ने स्पष्ट किया कि अपनी सेहत और संपत्ति की सुरक्षा के लिए मेडिकल इंश्योरेंस और जनरल इंश्योरेंस (सभी प्रकार) कराना मुसलमानों के लिए जायज (Allowed) है।
विरासत (Miras) पर सख्त निर्देश:
दहेज और विरासत: शादी में भारी दहेज (Jahez) देने से पैतृक संपत्ति में बेटी का अधिकार खत्म नहीं होता। उसे उसका हिस्सा देना अनिवार्य है।
हिंसा माफ करना: बहन का अपने भाई के लिए अपना हिस्सा केवल “जुबानी माफ” कर देना मान्य नहीं है; कानूनी तौर पर हिस्सा उसी का रहता है।
कर्ज की अदायगी: मरने वाले का कर्ज (Debt) चुकाए बिना विरासत नहीं बांटी जा सकती।
गोद लेना (Adoption): गोद दिया गया बच्चा अपने असली पिता (Biological Father) की संपत्ति में वारिस बना रहेगा।
पत्नी की कमाई: पत्नी की निजी कमाई से खरीदी गई चीजें उसकी मौत के बाद उसकी संपत्ति मानी जाएंगी। इसमें सिर्फ पति नहीं, बल्कि उसके सभी वारिस (मां, बाप, पति, बच्चे) हिस्सेदार होंगे।
मां की संपत्ति: अगर मां छोटे बेटे के साथ रहती है, तो उनके निधन पर संपत्ति पर केवल छोटे बेटे का हक नहीं होगा, बल्कि वह सभी वारिसों में बंटेगी।
घरेलू दिशानिर्देश:
संयुक्त घर: पति और पत्नी की मिली-जुली कमाई से बने घर के बारे में बताया गया कि पत्नी के निधन के बाद यह पति के हिस्से/प्रबंधन में रहेगा।
सुलह: अगर पत्नी नाराज होकर मायके चली गई है, तो पति को सलाह दी गई है कि वह आगे बढ़कर माफी मांगे और सुलह करे।

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