जेल की ज़िन्दगी कैदियों की कहानि पहुंचेंगी लोगों तक

Spread the love

भालचंद्र मुंगेकर- आनंद तेलतुम्बड़े की किताब ‘द सेल एंड द सोल’ का विमोचन

*जेल की ज़िन्दगी कैदियों की कहानि पहुंचेंगी लोगों तक*

*भालचंद्र मुंगेकर- आनंद तेलतुम्बड़े की किताब ‘द सेल एंड द सोल’ का विमोचन*

मुंबई / अकबर खान

मुंबई : तेलतुम्बड़े की किताब ‘द सेल एंड द सोल’ के विमोचन मुंबई मराठी पत्रकार संघ मे हुवा l  आनंद तेलतुम्बड़े इस बात का एक अच्छा उदाहरण हैं कि सरकारी व्यवस्था जेल में कैदीओं की ज़िंदगी कैसे बर्बाद करती है। हालाँकि, पूर्व सांसद डॉ. भालचंद्र मुंगेकर ने कहा कि तेलतुम्बड़े ने 31 महीने की कैद के दौरान जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया। वही मुंगेकर ने कहा कि जेल के अनुभव पर आधारित तेलतुम्बड़े की किताब दर्शाती है इसे समझने के लिए कि हमारा देश किस स्थिति कैसी है पढ़ना ज़रूरी है। दुनिया के कई देशों में जेल व्यवस्था को ध्वस्त किया जा रहा है l लोगों को जेल में डालने से अपराध खत्म नहीं होते, व्यवस्था को इस बात का ध्यान रखना होगा कि अपराध न हों। तेलतुम्बड़े के मामले में पर्याप्त सबूत न होने के बावजूद, उन्हें 31 महीने जेल में रहना पड़ा। उन्होंने निर्दोष लोगों को गलत तरीके से जेल में डालने वालों से माफ़ी मांगने की माँग की। मुंगेकर ने खेद व्यक्त किया कि जेल सुधारों के संबंध में संसद में कई रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद भी स्थिति नहीं बदली है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था चाहे कोई भी हो, शासक वर्ग के हितों की हमेशा रक्षा की जाती है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि एक नई धारणा फैलाई जा रही है कि जो लोग शासक वर्ग की नीतियों का पालन नहीं करते, वे राष्ट्र-विरोधी हैं। मुंगेकर ने बताया कि जेल में उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और जेल नियमावली के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया। आनंद तेलतुम्बड़े ने कहा, “मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं जेल जाऊँगा, जेल के दिन एक बुरे सपने जैसे होते हैं।” इस अवसर पर ऐहतशाम सिद्दीकी, एडवोकेट मिहिर देसाई, एडवोकेट गायत्री सिंह, डॉ. अब्दुल वाहिद शेख, चिराग ठक्कर उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विवेक कोर्डे ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Call Now Button